रविवार, 28 अगस्त 2011

काज करू,तखन बाजू !


की लेब, गप्प? लिय'लप्प के लप्प । मुदा हमरो लगै छल ई सब गप्पे छियै । जखन व्यक्तिगत स्वार्थ टकराइ छै त' सर्व प्रथम सिद्धांत पानि भरै लए चल जाति छै। अन्नाक अनशन,जन सम्रर्थन,फेर ओकर समाप्ति सब किछु हमरा गप्प लगैये । जनलोक पाल मे एन.जी.ओ.के कियैक ने राखल गेलै ? की हेतै ज' जनलोक पाले मे भ्रष्टाचार पैसि जाइ ? ओकरा पर के नजरि रखतै ? अन्ना कि केजरीवाल कि शांति भूषण कि किरण बेदी चुनाव नंइ लड्ती...जे.पी. सेहो चुनाव नंइ लडला,कोनो जबाबदेही नंइ लेलनि । ई त' आरो भयावह । अरे अहां उत्तरदायित्व ल'क' काज करियौ आ लोकके देखबियौ जे अहां कोना काजरक कोठली मे रहियो क'बेदाग छी । तखन ने लोक बूझत । आ सोझे कुचेष्टा कारबा मे की
छै? क्यो क' सकैये । काज क' क' देखबियौ,तखन ने बूझब अन्ना । ई देश अदौ स' भ्रष्टाचार मे लिप्त छै,एकरा ने बचबियौ । दोसर "दूसरी आज़ादी"...बहुत भेलै ।

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