बुधवार, 19 मई 2010

किछु अकारण नंइ !

किछु नंइ-- दुनियाँक कोनो काज अकारण नंइ! ने बिना कारणे टिटही बजै छै आ ने बैदजीकघोडे
चलै छनि । अहि युग मे दर्शनक आन जे कोनो पक्ष स्पष्ट नंइ हुए, मुदा 'कार्य्‌-कारण सिध्धांत' धरि एक दम स्पष्ट छैक इस हाथ ले, उस हाथ दे ! बड़-बड जनके भांसल जाइत देखने छियनि। हामर माथ मे माया चक्कर काटि रहल अछि। मनुषयक बनाओल पैसा, हमरा सबहक मनःस्थिति के कोना प्रभावित करैछ ? ओकरा में कोन गुण छैक ? यैह ने जे ओ किछु सुविधाकीन सकैत अछि...ओहो सब नंइ, मात्र किछु ? देख' हौ महादेव, तखन कियैक भरि जीवन ओकर तावेदारी ? पाइ रहने अहाँ ओकर भोग क' लेब तकरो कोनो गारंटी नंइ...घर बना क' रहि लेब; सेहो जँ लिखल हैत,तखनंहि । सेहो हैत सब किछु समये पाबि क'ने यौ ? तैं बेसी रौह बचवा जेकाँ तडफडाबी नंइबेसी।...अधिक लोभ बगुलबे किन्हा,छन मे प्राण स्ररग चल गिन्हा।' हेबाक पूर्ण संभावना! तैं ओतबे खाइ जे जुरय,रुचे आ पचे । अपन अहि सब
सिध्धांत सब पर चलि क'हम कहियो पाछतायल होइ एहन बात नंइ । हमरा जनैत सब के सांसारिकता निमाहैक सेहो किछु
सिध्धांत होइ छैक किंबा हेबाक चाही...आ कि नंइ ?

2 टिप्‍पणियां:

  1. आपने कहा कि इस दुनियाँ मे अकारण कुछ नंही होता, लेकिन मैं आप के इस बात से सहमत नहीं हूं।जीवन मे ढेर सारी घटना--दुर्घटनायें अकारण भी होतीं हैं। मेरी समझ से जीवन मे पैसे की अहमियत को कोई नहीं नकार सकता है। सुम3131@याहू.कोम्।

    उत्तर देंहटाएं
  2. जीवन में अक्सर अकारण भी बहुत सारी चीजें हुआ करती हैं। पैसे की अहमियत को भला कौन नकार सकता है ?
    Suman3131@yahoo.com

    उत्तर देंहटाएं