टेक्नोलौजी अहांके पंगु बना देत,अहां के भंगठिक'तेना काटि देत जे अहां बुझबो ने करबै आ अहाँक कतल भ' गेल रहत । आब यैह देखियौ जे मसावधि भेलै, तखन जा क' इंटर-नेट व्यवस्थित भ' सकल आ हमरा लोकनि मे फेर गप संभव भ' सकल। इंटर-नेटक दुनियाँ मे एक तरहक नंइ, नाना प्रकारक भ्रष्टाचार छैक, अफसर,उद्योगपतिक तेहन दुरभि--संधि छैक--जे अहांक नाकक नीचा देने दही बंटाइत रहत आ अहां के पता तक नंइ!मुदा ब्लौग लिखै लएत' इंटरनेटा त' चाही ? जे से...अइ बीच मे भेलै त' से सब जे लिख लागब त'उपन्यास लिख' पडत । लिखलखिन अमर जी जे..."विष्ठी लए दंतखिष्ठी जकरा--जोडा बडद द्वार पर तकरा...।" से खेल सुरुओ ने भेल रहै. खेलाडी सब आएलो ने छलै कि दुनियाँक मीडियाके दिल्लीक खेल गांव मे सांप-बिछ्छू भेट' लगलै, सब देश' खास क' भारतक असली दुश्मन इंगलैंड्क मुख्य भंसीया चिचियेलै भारत बुते राष्ट्रमंडल खेल आयोजित कैलनंइ हेतै...अष्ट्रेलिया आ दांत मे फंसल सुपारी बरोबरि देश न्यूजीलैंडोके एत' असोकर्ज हेबाक संभावना बुझेलै । अपने भले कोनो होस्टल कि कोनो गोदाम मे खेलाडी कियैक ने ठहरेने हुए...मैंचेस्टर मे की भेलै से लोक बिसरलैये ? बिसरैक बात छैक ?...से आइ आठम दिन चियै... इंग्लैड कि औष्ट्रेलिया...कहां ककरो चौ अलगलै...कहां किछु भेलै...आइ त' आठ दिन भेलै कहां ककरो सांप डंसलकै कि कहां कक्रो दें&गु भेलै ।अंतराष्ट्रीय बिरादरी, तहूमे गोरका चमडी बला के अपन देश के मोजर दै मे बड अधलाह लगै चई..खास क' अगंरेजक घराइनक जुना त' जरि गेल छै...भारतक सामने औकाति त' छै नंइ...रहि गेल छै बस अॅईंतःई ।
6ड
6
6धि
रविवार, 10 अक्टूबर 2010
सोमवार, 16 अगस्त 2010
आम जन
विचित्र बात, नंइ पार्ट्नर ! अहीं कहू जे जाहि देश मे अभूतपूर्व बाढि मे अपार धन-जन तबाह भेल हुए,तेकर राष्ट्रपति विदेश विचरैलए जेतै ? जरदारी सनक भ्रष्ट जं' नेता रहत त' यैह हैत ।
ग्लोबल वार्मिंग अथवा प्रकृतिक संग भेल अत्याचारक कारणें किछु तेहन प्राकृतिक आपदा सब आबि रहल छै जे अहि पर कोनो अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विचारक तत्काल जरूरति छै । ओना टेढी मे पाकिस्तानक जबाब नंइ छै, मुदा एखन सब किछ
बिसरि क' भारत के पडोसियाक धर्म निभेवाक चाही--आ पाकिस्तानक बाढि पीडित जनता के काहत मे राहतक वस्तु जात ल' क' ठाढ हेबाक चाही । मुदा एत' एकटा फ्यौ छै । पाकिस्तान सरकार अंतर राष्ट्रीय समुदाय के पछिला दिन आयल भूकंपक समय तेना ठकने छै जे क्यो हठें सहायता दइ लए तैयार नंइ होइ छै । फेर ककरा देतै ? सरकार के,
पार्टी के कि सेना के... आ कि लश्कर,हूजी सन छद्म संगठन के ? फेर अहि 'इम्दाद'के पाकिस्तानी सबहक मुख्य
"टाइम-पास" भारतक संग लडाइक तैयारी मे नंइ लगा लेतै तेकर की गारंटी ?पाकिस्तानी सरकार आ अंतृराष्ट्रीय
बिरादरीक उपेक्षा मे मरि रहल छै पाकिस्तानक आम-जन । अइ 'मेस' के लाभ पाकिस्तान मे सरकारी सह पाबि क'
फल-फूलि रहल आतंकवादी संगठन सब उठा रहल हुए त' कोन आश्चर्य ! हमरा त' लगैत अछि जे पाकिस्तानक
लोको के यह मार-काट,उठा-पटक चाही । तैं ने जरदारी सनक लोक सत्ताक शीर्ष पर बैसल छै !
ग्लोबल वार्मिंग अथवा प्रकृतिक संग भेल अत्याचारक कारणें किछु तेहन प्राकृतिक आपदा सब आबि रहल छै जे अहि पर कोनो अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विचारक तत्काल जरूरति छै । ओना टेढी मे पाकिस्तानक जबाब नंइ छै, मुदा एखन सब किछ
बिसरि क' भारत के पडोसियाक धर्म निभेवाक चाही--आ पाकिस्तानक बाढि पीडित जनता के काहत मे राहतक वस्तु जात ल' क' ठाढ हेबाक चाही । मुदा एत' एकटा फ्यौ छै । पाकिस्तान सरकार अंतर राष्ट्रीय समुदाय के पछिला दिन आयल भूकंपक समय तेना ठकने छै जे क्यो हठें सहायता दइ लए तैयार नंइ होइ छै । फेर ककरा देतै ? सरकार के,
पार्टी के कि सेना के... आ कि लश्कर,हूजी सन छद्म संगठन के ? फेर अहि 'इम्दाद'के पाकिस्तानी सबहक मुख्य
"टाइम-पास" भारतक संग लडाइक तैयारी मे नंइ लगा लेतै तेकर की गारंटी ?पाकिस्तानी सरकार आ अंतृराष्ट्रीय
बिरादरीक उपेक्षा मे मरि रहल छै पाकिस्तानक आम-जन । अइ 'मेस' के लाभ पाकिस्तान मे सरकारी सह पाबि क'
फल-फूलि रहल आतंकवादी संगठन सब उठा रहल हुए त' कोन आश्चर्य ! हमरा त' लगैत अछि जे पाकिस्तानक
लोको के यह मार-काट,उठा-पटक चाही । तैं ने जरदारी सनक लोक सत्ताक शीर्ष पर बैसल छै !
सोमवार, 9 अगस्त 2010
" किछु नंइ-- कहां किछु !"
नंइ, किछु नंई । कहां किछु ? कत्तौ किछु होइत होइ से कहाँ बुझना जाइत अछि । सब किछु
चर्वित-च्रर्वण सन लगैत अछि । ककरा कहबै...के पतियैत....अहांक हाथ साहित्य रचैत-रचैत पं.गोविंद झाक हाथ
कियैक ने बनल जाइत हो....जत'पद...पाइ...आ प्रतिष्ठा के सवाल हेतै त' वैह....विभुती नारायण सिंह सनक
लोक भैंस चांस्लरो (वाइस चांसलर )बनल रहत--- भले सब महिला लेखिका के खुले आम " छिनारि" कियै ने कहथुन
हमरा त'इहो आश्चर्य होइये जे "सिंह साहेब" अपन लेखिका पत्नी के की बुझै छथिन...वैह...छिनारि ?
इम्हर अल्पसंख्यक (कियैक मुसलमान कहियै !) वोटक राजनीति मे बंग्ला लेखिका तस्लीमा नसरीन के पूबक प्रसिध्ध देश
'भारत दैट इज इंडिया' सब धर्म निरपेक्षता घोसडि गेल सन लगैत अछि । कारण मात्र एकटा--आधुनिक शिक्षा मे पढल-
गुनल लोक कोनो धर्मक संकीर्णताक विरोध त' करबे करतै ? इस्लामी कट्टरपंथी के की चाही । तस्लीमा नंइ, डा.तस्लीमा
दर-दर के ठोकर खा रहल छथि, आ बुध्धिजीवी, खासक' बंगालक ओ जुझारू बुध्धिजीवि ब्राजीलक मुद्दा त' उठा सकैत
छथि...एत' त' मामले दोसर छै । धुर मर्दे! अहू सबमे क्यो पडय ? नंदीग्राम की पूरा जंगळ महाल मे की भ' रहल छैक क्यो कहिसकै अछि ? ममता, बुध्धदेब,की के ? तैं किछु नंइ...कहां किछु !
चर्वित-च्रर्वण सन लगैत अछि । ककरा कहबै...के पतियैत....अहांक हाथ साहित्य रचैत-रचैत पं.गोविंद झाक हाथ
कियैक ने बनल जाइत हो....जत'पद...पाइ...आ प्रतिष्ठा के सवाल हेतै त' वैह....विभुती नारायण सिंह सनक
लोक भैंस चांस्लरो (वाइस चांसलर )बनल रहत--- भले सब महिला लेखिका के खुले आम " छिनारि" कियै ने कहथुन
हमरा त'इहो आश्चर्य होइये जे "सिंह साहेब" अपन लेखिका पत्नी के की बुझै छथिन...वैह...छिनारि ?
इम्हर अल्पसंख्यक (कियैक मुसलमान कहियै !) वोटक राजनीति मे बंग्ला लेखिका तस्लीमा नसरीन के पूबक प्रसिध्ध देश
'भारत दैट इज इंडिया' सब धर्म निरपेक्षता घोसडि गेल सन लगैत अछि । कारण मात्र एकटा--आधुनिक शिक्षा मे पढल-
गुनल लोक कोनो धर्मक संकीर्णताक विरोध त' करबे करतै ? इस्लामी कट्टरपंथी के की चाही । तस्लीमा नंइ, डा.तस्लीमा
दर-दर के ठोकर खा रहल छथि, आ बुध्धिजीवी, खासक' बंगालक ओ जुझारू बुध्धिजीवि ब्राजीलक मुद्दा त' उठा सकैत
छथि...एत' त' मामले दोसर छै । धुर मर्दे! अहू सबमे क्यो पडय ? नंदीग्राम की पूरा जंगळ महाल मे की भ' रहल छैक क्यो कहिसकै अछि ? ममता, बुध्धदेब,की के ? तैं किछु नंइ...कहां किछु !
मंगलवार, 6 जुलाई 2010
आऊ, पाकिस्तान-पाकिस्तान खेलाइ !
शीर्षक उकडू लगैत अछि ने ! मुदा जँ झूठ बजै मे महारथी बनबाक होअय,तकर ट्रेनिंग पाकिस्तान
जेहन द' सकैत अछि से हिटलरक प्रसिध्ध प्रसार मंत्री गोएबल्सो ने द' सकै छला ,ओहो लजा जैतथि । सब जनै छै जे जमात-उ-दावा लश्करक मुखडा छियै, जकरा सब साल पाकिस्तान सरकार लाखों नंइ करोडों टाका दैछै । ई संस्था नाम कर्म क' क' पछिला बीसो साल स'ओ अमेरिका आ भारत मे अनवरत आतंकवादी पठ्बैत रहल अछि। खाइ लए नंइ छैक; तेन किम ? अणु बम बनबैक
क्षमता छैक, चीन आ कोरियाक कृपा स' अणु बमक नीक भंडार छैक । भारतक कोनो शहरके मारि सकै बला मिसाइल । एतबे
नंइ ओकरा चलेबाक दुस्साहसो छैक...भलें तकर बाद देश जर्मनी जेकां मलबा कियैक ने बनि जाय । पाकिस्तान मे भारतो स' सस्ता मनुख्खक मोल छैक । अपने आत्म्घाती दस्ता बनेबाक बाकायदा ट्रेनिंग दियेलकै, आब वैह सब अपनो देश मे दोसर विचार धाराक लोक के मारै छै त' कोन बेजाय करै छै ? आब मियाँक जूती--मियेंक सर !
जेहन द' सकैत अछि से हिटलरक प्रसिध्ध प्रसार मंत्री गोएबल्सो ने द' सकै छला ,ओहो लजा जैतथि । सब जनै छै जे जमात-उ-दावा लश्करक मुखडा छियै, जकरा सब साल पाकिस्तान सरकार लाखों नंइ करोडों टाका दैछै । ई संस्था नाम कर्म क' क' पछिला बीसो साल स'ओ अमेरिका आ भारत मे अनवरत आतंकवादी पठ्बैत रहल अछि। खाइ लए नंइ छैक; तेन किम ? अणु बम बनबैक
क्षमता छैक, चीन आ कोरियाक कृपा स' अणु बमक नीक भंडार छैक । भारतक कोनो शहरके मारि सकै बला मिसाइल । एतबे
नंइ ओकरा चलेबाक दुस्साहसो छैक...भलें तकर बाद देश जर्मनी जेकां मलबा कियैक ने बनि जाय । पाकिस्तान मे भारतो स' सस्ता मनुख्खक मोल छैक । अपने आत्म्घाती दस्ता बनेबाक बाकायदा ट्रेनिंग दियेलकै, आब वैह सब अपनो देश मे दोसर विचार धाराक लोक के मारै छै त' कोन बेजाय करै छै ? आब मियाँक जूती--मियेंक सर !
बुधवार, 26 मई 2010
बुधवार, 19 मई 2010
किछु अकारण नंइ !
किछु नंइ-- दुनियाँक कोनो काज अकारण नंइ! ने बिना कारणे टिटही बजै छै आ ने बैदजीकघोडे
चलै छनि । अहि युग मे दर्शनक आन जे कोनो पक्ष स्पष्ट नंइ हुए, मुदा 'कार्य्-कारण सिध्धांत' धरि एक दम स्पष्ट छैक इस हाथ ले, उस हाथ दे ! बड़-बड जनके भांसल जाइत देखने छियनि। हामर माथ मे माया चक्कर काटि रहल अछि। मनुषयक बनाओल पैसा, हमरा सबहक मनःस्थिति के कोना प्रभावित करैछ ? ओकरा में कोन गुण छैक ? यैह ने जे ओ किछु सुविधाकीन सकैत अछि...ओहो सब नंइ, मात्र किछु ? देख' हौ महादेव, तखन कियैक भरि जीवन ओकर तावेदारी ? पाइ रहने अहाँ ओकर भोग क' लेब तकरो कोनो गारंटी नंइ...घर बना क' रहि लेब; सेहो जँ लिखल हैत,तखनंहि । सेहो हैत सब किछु समये पाबि क'ने यौ ? तैं बेसी रौह बचवा जेकाँ तडफडाबी नंइबेसी।...अधिक लोभ बगुलबे किन्हा,छन मे प्राण स्ररग चल गिन्हा।' हेबाक पूर्ण संभावना! तैं ओतबे खाइ जे जुरय,रुचे आ पचे । अपन अहि सब
सिध्धांत सब पर चलि क'हम कहियो पाछतायल होइ एहन बात नंइ । हमरा जनैत सब के सांसारिकता निमाहैक सेहो किछु
सिध्धांत होइ छैक किंबा हेबाक चाही...आ कि नंइ ?
चलै छनि । अहि युग मे दर्शनक आन जे कोनो पक्ष स्पष्ट नंइ हुए, मुदा 'कार्य्-कारण सिध्धांत' धरि एक दम स्पष्ट छैक इस हाथ ले, उस हाथ दे ! बड़-बड जनके भांसल जाइत देखने छियनि। हामर माथ मे माया चक्कर काटि रहल अछि। मनुषयक बनाओल पैसा, हमरा सबहक मनःस्थिति के कोना प्रभावित करैछ ? ओकरा में कोन गुण छैक ? यैह ने जे ओ किछु सुविधाकीन सकैत अछि...ओहो सब नंइ, मात्र किछु ? देख' हौ महादेव, तखन कियैक भरि जीवन ओकर तावेदारी ? पाइ रहने अहाँ ओकर भोग क' लेब तकरो कोनो गारंटी नंइ...घर बना क' रहि लेब; सेहो जँ लिखल हैत,तखनंहि । सेहो हैत सब किछु समये पाबि क'ने यौ ? तैं बेसी रौह बचवा जेकाँ तडफडाबी नंइबेसी।...अधिक लोभ बगुलबे किन्हा,छन मे प्राण स्ररग चल गिन्हा।' हेबाक पूर्ण संभावना! तैं ओतबे खाइ जे जुरय,रुचे आ पचे । अपन अहि सब
सिध्धांत सब पर चलि क'हम कहियो पाछतायल होइ एहन बात नंइ । हमरा जनैत सब के सांसारिकता निमाहैक सेहो किछु
सिध्धांत होइ छैक किंबा हेबाक चाही...आ कि नंइ ?
रविवार, 9 मई 2010
ह्मरअपराध,हुनक नहि दोष !
हमर ब्लौग पढै बला सब ब्लौगबंधु ! ह्म अनुपस्थित छ्लंहु तै मे हमर दोष रहै, ई
कह्ब ह्मर संगे अत्याचार हैत । हम मन मसोसि क’ अपन देश भक्ति आ देश प्रेमक गला मोंकै मे लागल रही । सत्य ज’ पूछी त’ कंप्यूटर किनलाक डेढ बर्खक बाद हम बी.एस.एन.एल.क डाटा कार्ड लेने रही जे कोनो ‘मोदी,तोदी, बाटा ,टाटा के पाइ देबा स’नीक सरकारी बी.एस.एन.एल.के पाइ दियै । मुदा दू साल स’ ई हाथीक दांत बनि
गेल छल । पछिला दिन ओकरा स’ फारकती पायल । आब कने सुस्ते शी, कनेक्शन त’ रहये ! ई बिहारे नंइ पूरा देश मे, सबतरि काज करत। ई अपना आप मे बहुत सुख
पहुंचबैला तथ्य अछि । कत’ सुदूर देहातक, कोसिकन्हाक नौह्ट्टा आ ओत’ इंटरनेट ? की आश्चर्यो ? अर्धंग डाक्तर (स्व.डाक्टर अर्धेंदु शेखर घोष) किंबा डा. मकुर्जी (मुखर्जी) कि अपन सुपति नाथ घोष स’ ज’ पुछितियनि त’ यैह कहितथि....” उरे बाबा ! की आश्चर्यो ? लेकिन यथार्थ मे स्थिति यैह छै । मोबाइल, इंटरनेट स’ दूरी जत्ते घटलैक अछि, मोनक, स्नेह्क ओतबे कमी, आपकताक त’ सर्वथा लोपे भ’ गेलैक अछि। सबहक मूल्यांकन ओकर गुण अवगुण स’ नहि, ओ कोना येनकेन प्रकारेण,
अहांक काज क’ सकैत अछि, अहि पर निर्भर छैका
कह्ब ह्मर संगे अत्याचार हैत । हम मन मसोसि क’ अपन देश भक्ति आ देश प्रेमक गला मोंकै मे लागल रही । सत्य ज’ पूछी त’ कंप्यूटर किनलाक डेढ बर्खक बाद हम बी.एस.एन.एल.क डाटा कार्ड लेने रही जे कोनो ‘मोदी,तोदी, बाटा ,टाटा के पाइ देबा स’नीक सरकारी बी.एस.एन.एल.के पाइ दियै । मुदा दू साल स’ ई हाथीक दांत बनि
गेल छल । पछिला दिन ओकरा स’ फारकती पायल । आब कने सुस्ते शी, कनेक्शन त’ रहये ! ई बिहारे नंइ पूरा देश मे, सबतरि काज करत। ई अपना आप मे बहुत सुख
पहुंचबैला तथ्य अछि । कत’ सुदूर देहातक, कोसिकन्हाक नौह्ट्टा आ ओत’ इंटरनेट ? की आश्चर्यो ? अर्धंग डाक्तर (स्व.डाक्टर अर्धेंदु शेखर घोष) किंबा डा. मकुर्जी (मुखर्जी) कि अपन सुपति नाथ घोष स’ ज’ पुछितियनि त’ यैह कहितथि....” उरे बाबा ! की आश्चर्यो ? लेकिन यथार्थ मे स्थिति यैह छै । मोबाइल, इंटरनेट स’ दूरी जत्ते घटलैक अछि, मोनक, स्नेह्क ओतबे कमी, आपकताक त’ सर्वथा लोपे भ’ गेलैक अछि। सबहक मूल्यांकन ओकर गुण अवगुण स’ नहि, ओ कोना येनकेन प्रकारेण,
अहांक काज क’ सकैत अछि, अहि पर निर्भर छैका
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